TRUE STATUS OF THE EQUIPOISED MIND

GITA WISDOM # 61 Chapter 59 Verse 2 विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः।रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्टवा निवर्तते॥ इन्द्रियों द्वारा विषयों को ग्रहण न करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, परन्तु उनमें रहने वाली आसक्ति निवृत्त नहीं होती। इस स्थितप्रज्ञ पुरुष की तो आसक्ति भी परमात्मा का साक्षात्कार करके निवृत्त होContinue reading “TRUE STATUS OF THE EQUIPOISED MIND”

THE GENTLE GUIDANCE

GITA WISDOM # 60 Chapter 2 verse 10 तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत।सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदंतमिदं वचः॥ हे भरतवंशी धृतराष्ट्र! अंतर्यामी श्रीकृष्ण महाराज दोनों सेनाओं के बीच में शोक करते हुए उस अर्जुन को हँसते हुए से यह वचन बोले ॥10॥ Krishna opens his advice, with a semblance of a gentle smile, to the grief-struck Arjuna. This befitsContinue reading “THE GENTLE GUIDANCE”

SKILLS AND COMPETENCE

GITA WISDOM # 59 Chapter 4 verse 32 एवं बहुविधा यज्ञा वितता ब्रह्मणो मुखे।कर्मजान्विद्धि तान्सर्वानेवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे॥ इसी प्रकार और भी बहुत तरह के यज्ञ वेद की वाणी में विस्तार से कहे गए हैं। उन सबको तू मन, इन्द्रिय और शरीर की क्रिया द्वारा सम्पन्न होने वाले जान, इस प्रकार तत्व से जानकर उनके अनुष्ठानContinue reading “SKILLS AND COMPETENCE”

WIN-WIN APPROACH

GITA WISDOM # 58 Chapter 3 verse 11 देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः।परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ॥ तुम लोग इस यज्ञ द्वारा देवताओं को उन्नत करो और वे देवता तुम लोगों को उन्नत करें। इस प्रकार निःस्वार्थ भाव से एक-दूसरे को उन्नत करते हुए तुम लोग परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे ॥11॥ Chief executives shallContinue reading “WIN-WIN APPROACH”

GREAT MIND

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Truth is always served by great minds, even if they fight it. “Jean Rostand” As your thoughts are, so is your life. Weak thoughts hardly have any effect, but powerful thoughts can create great change. Thoughts are energy. Though subtle and invisible, they can affect reality. Just like the wind, which…

THE TORTOISE SYNDROME

GITA WISDOM # 57 Chapter 2 Verse 58 यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गनीव सर्वशः।इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥ और कछुवा सब ओर से अपने अंगों को जैसे समेट लेता है, वैसे ही जब यह पुरुष इन्द्रियों के विषयों से इन्द्रियों को सब प्रकार से हटा लेता है, तब उसकी बुद्धि स्थिर है (ऐसा समझना चाहिए) ॥58॥ The leaderContinue reading “THE TORTOISE SYNDROME”

CONFLICTING GUIDANCE

GITA WISDOM # 56 Chapter 3 Verse 2 व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे।तदेकं वद निश्चित्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम्‌॥ आप मिले हुए-से वचनों से मेरी बुद्धि को मानो मोहित कर रहे हैं। इसलिए उस एक बात को निश्चित करके कहिए जिससे मैं कल्याण को प्राप्त हो जाऊँ ॥2॥ The council or guidance provided must be simple; itContinue reading “CONFLICTING GUIDANCE”