HOW TO TRANSCEND THE HUMAN ATTRIBUTE – “BONDAGE”

GITA WISDOM # 66 Chapter 14 verse 25 मानापमानयोस्तुल्यस्तुल्यो मित्रारिपक्षयोः।सर्वारम्भपरित्यागी गुणातीतः सा उच्यते॥ जो मान और अपमान में सम है, मित्र और वैरी के पक्ष में भी सम है एवं सम्पूर्ण आरम्भों में कर्तापन के अभिमान से रहित है, वह पुरुष गुणातीत कहा जाता है ॥25॥ The path to cross the human bondage involves twoContinue reading “HOW TO TRANSCEND THE HUMAN ATTRIBUTE – “BONDAGE””

THE FREEDOM STATE OF MIND

GITA WISDOM # 62 Chapter 2 verse 72 एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति।स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति॥ हे अर्जुन! यह ब्रह्म को प्राप्त हुए पुरुष की स्थिति है, इसको प्राप्त होकर योगी कभी मोहित नहीं होता और अंतकाल में भी इस ब्राह्मी स्थिति में स्थित होकर ब्रह्मानन्द को प्राप्त हो जाता है ॥72॥ Once a leaderContinue reading “THE FREEDOM STATE OF MIND”