WHEN LAZINESS SURFACES

GITA WISDOM # 68Chapter 14 Verse 13 अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च।तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन॥ हे अर्जुन! तमोगुण के बढ़ने पर अन्तःकरण और इंन्द्रियों में अप्रकाश, कर्तव्य-कर्मों में अप्रवृत्ति और प्रमाद अर्थात व्यर्थ चेष्टा और निद्रादि अन्तःकरण की मोहिनी वृत्तियाँ – ये सब ही उत्पन्न होते हैं ॥13॥ Human beings suffer from various melodies whenContinue reading “WHEN LAZINESS SURFACES”

WHEN TENSIONS ARISE

GITA WISDOM # 67Chapter 14 Verse 12 लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृहा।रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ॥ हे अर्जुन! रजोगुण के बढ़ने पर लोभ, प्रवृत्ति, स्वार्थबुद्धि से कर्मों का सकामभाव से आरम्भ, अशान्ति और विषय भोगों की लालसा- ये सब उत्पन्न होते हैं ॥12॥ When the greed-based behaviour surfaces, there is perceptible increase in selfish desires and earthlyContinue reading “WHEN TENSIONS ARISE”

HOW TO TRANSCEND THE HUMAN ATTRIBUTE – “BONDAGE”

GITA WISDOM # 66 Chapter 14 verse 25 मानापमानयोस्तुल्यस्तुल्यो मित्रारिपक्षयोः।सर्वारम्भपरित्यागी गुणातीतः सा उच्यते॥ जो मान और अपमान में सम है, मित्र और वैरी के पक्ष में भी सम है एवं सम्पूर्ण आरम्भों में कर्तापन के अभिमान से रहित है, वह पुरुष गुणातीत कहा जाता है ॥25॥ The path to cross the human bondage involves twoContinue reading “HOW TO TRANSCEND THE HUMAN ATTRIBUTE – “BONDAGE””

HOW TO ATTAIN PEACE

GITA WISDOM # 65Chapter 14 verse 20 गुणानेतानतीत्य त्रीन्देही देहसमुद्भवान्‌।जन्ममृत्युजरादुःखैर्विमुक्तोऽमृतमश्नुते॥ यह पुरुष शरीर की (बुद्धि, अहंकार और मन तथा पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, पाँच भूत, पाँच इन्द्रियों के विषय- इस प्रकार इन तेईस तत्त्वों का पिण्ड रूप यह स्थूल शरीर प्रकृति से उत्पन्न होने वाले गुणों का ही कार्य है, इसलिए इन तीनों गुणों कोContinue reading “HOW TO ATTAIN PEACE”

THE SPOKEN WORD

GITA WISDOM # 64 Chapter 17 verse 15 अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्‌।स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्‍मयं तप उच्यते॥ जो उद्वेग न करने वाला, प्रिय और हितकारक एवं यथार्थ भाषण है (मन और इन्द्रियों द्वारा जैसा अनुभव किया हो, ठीक वैसा ही कहने का नाम ‘यथार्थ भाषण’ है।) तथा जो वेद-शास्त्रों के पठन का एवं परमेश्वरContinue reading “THE SPOKEN WORD”

THE FUNCTIONS OF THE BODY

GITA WISDOM # 63 Chapter 17 verse 14 देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्‌।ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते॥ देवता, ब्राह्मण, गुरु (यहाँ ‘गुरु’ शब्द से माता, पिता, आचार्य और वृद्ध एवं अपने से जो किसी प्रकार भी बड़े हों, उन सबको समझना चाहिए।) और ज्ञानीजनों का पूजन, पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा- यह शरीर- सम्बन्धी तप कहा जाता हैContinue reading “THE FUNCTIONS OF THE BODY”

THE FREEDOM STATE OF MIND

GITA WISDOM # 62 Chapter 2 verse 72 एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति।स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति॥ हे अर्जुन! यह ब्रह्म को प्राप्त हुए पुरुष की स्थिति है, इसको प्राप्त होकर योगी कभी मोहित नहीं होता और अंतकाल में भी इस ब्राह्मी स्थिति में स्थित होकर ब्रह्मानन्द को प्राप्त हो जाता है ॥72॥ Once a leaderContinue reading “THE FREEDOM STATE OF MIND”