THE RESULT OF UNBALANCED MIND

GITA WISDOM # 72Chapter 2 Verse 66-67 नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम्‌॥ ~ 2.66 न जीते हुए मन और इन्द्रियों वाले पुरुष में निश्चयात्मिका बुद्धि नहीं होती और उस अयुक्त मनुष्य के अन्तःकरण में भावना भी नहीं होती तथा भावनाहीन मनुष्य को शान्ति नहीं मिलती और शान्तिरहित मनुष्य को सुख कैसेContinue reading “THE RESULT OF UNBALANCED MIND”

THE PATH TO A STEADY MIND

GITA WISDOM # 71Chapter 2 Verse 65 प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते।प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते॥ श्लोक 65 – अध्याय 2 – गीता का सार     अन्तःकरण की प्रसन्नता होने पर इसके सम्पूर्ण दुःखों का अभाव हो जाता है और उस प्रसन्नचित्त वाले कर्मयोगी की बुद्धि शीघ्र ही सब ओर से हटकर एक परमात्मा में ही भलीभाँतिContinue reading “THE PATH TO A STEADY MIND”

WORLD LAUGHTER DAY

It’s celebrated on the first Sunday in the month of May. World Laughter Day was established in 1998 and the first celebration was on July 28, 2008, in Mumbai, India, arranged by Dr. Madan Kataria, founder of the worldwide Laughter Yoga movement. Positive and powerful emotion that has all the ingredients required for individuals toContinue reading “WORLD LAUGHTER DAY”

WRITING AND OUR HEALTH

Originally posted on Story Empire:
Hi SEers! Denise here, and today I’m going to talk about how writing affects our health. Writing has many benefits for our minds and brain. Letting those written words flow keeps our mind sharp as we get older, helps solve problems, allows us to express ourselves, and opens the door…

TRUE STATUS OF THE EQUIPOISED MIND

GITA WISDOM # 61 Chapter 59 Verse 2 विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः।रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्टवा निवर्तते॥ इन्द्रियों द्वारा विषयों को ग्रहण न करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, परन्तु उनमें रहने वाली आसक्ति निवृत्त नहीं होती। इस स्थितप्रज्ञ पुरुष की तो आसक्ति भी परमात्मा का साक्षात्कार करके निवृत्त होContinue reading “TRUE STATUS OF THE EQUIPOISED MIND”