RECOGNISING INDIVIDUAL ATTITUDES

GITA WISDOM #24 सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि।प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति॥ सभी प्राणी प्रकृति को प्राप्त होते हैं अर्थात अपने स्वभाव के परवश हुए कर्म करते हैं। ज्ञानवान्‌ भी अपनी प्रकृति के अनुसार चेष्टा करता है। फिर इसमें किसी का हठ क्या करेगा॥33॥ In any organization, employees possess distinct individual traits and discharge theirContinue reading “RECOGNISING INDIVIDUAL ATTITUDES”

BEHAVIOUR AND STRESS

GITA WISDOM #23 ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः।श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽति कर्मभिः॥ जो कोई मनुष्य दोषदृष्टि से रहित और श्रद्धायुक्त होकर मेरे इस मत का सदा अनुसरण करते हैं, वे भी सम्पूर्ण कर्मों से छूट जाते हैं॥31॥ Eliminating the narrow attitude of fault-finding, executives who follow the ordained work ethics with full devotion, are relieved fromContinue reading “BEHAVIOUR AND STRESS”

THE RIGHT WAY OF CHARITY

GITA WISDOM #20 दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्‌॥ Have a great day…

THE EVIL THAT PEOPLE DO

GITA WISDOM #19 दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च।अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम्‌॥ Have a great day…