EDUCATE, DO NOT CONFUSE

GITA WISDOM # 56 Chapter 3 Verse 29 प्रकृतेर्गुणसम्मूढ़ाः सज्जन्ते गुणकर्मसु।तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत्‌॥ प्रकृति के गुणों से अत्यन्त मोहित हुए मनुष्य गुणों में और कर्मों में आसक्त रहते हैं, उन पूर्णतया न समझने वाले मन्दबुद्धि अज्ञानियों को पूर्णतया जानने वाला ज्ञानी विचलित न करे॥29॥ When the followers err in understanding the subtle differences between variousContinue reading “EDUCATE, DO NOT CONFUSE”

LEADING FROM THE FRONT

GITA WISDOM # 55 Chapter 3 Verse 26 न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङि्गनाम्‌।जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्तः समाचरन्‌॥ परमात्मा के स्वरूप में अटल स्थित हुए ज्ञानी पुरुष को चाहिए कि वह शास्त्रविहित कर्मों में आसक्ति वाले अज्ञानियों की बुद्धि में भ्रम अर्थात कर्मों में अश्रद्धा उत्पन्न न करे, किन्तु स्वयं शास्त्रविहित समस्त कर्म भलीभाँति करता हुआ उनसे भी वैसेContinue reading “LEADING FROM THE FRONT”

LEADERSHIP

GITA WISDOM # 53 Bhagavad Gita: Chapter 3 Verse 21 यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥ श्रेष्ठ पुरुष जो-जो आचरण करता है, अन्य पुरुष भी वैसा-वैसा ही आचरण करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण कर देता है, समस्त मनुष्य-समुदाय उसी के अनुसार बरतने लग जाता है (यहाँ क्रिया में एकवचन है, परन्तु ‘लोक’ शब्द समुदायवाचकContinue reading “LEADERSHIP”