आगाज़-ए-शायरी (शेर-ओ-शायरी)

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ख़ुदा के इशारों को समझ, हैं सही रब के फ़ैसलेमुश्किलात में वही देता है, तुम्हें सब्र और हौसलेइबादत, सख़ावत करके, कुछ नेकियां करले बंदेसजदे में सर झुकाकर, गुनाहों से तौबा तू कर ले। ★★★★★★★★★★★★★★★★★ मुझे छोड़कर, बना दे तू अजनबी, अगर मुझसे नफ़रत है,दूर मुझसे होकर, बढ़ती तेरी बेताबी,…