FALSE PRETENCES OF SPIRITUALITY

GITA WISDOM # 51 दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत्‌।स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत्‌॥ जो कुछ कर्म है वह सब दुःखरूप ही है- ऐसा समझकर यदि कोई शारीरिक क्लेश के भय से कर्तव्य-कर्मों का त्याग कर दे, तो वह ऐसा राजस त्याग करके त्याग के फल को किसी प्रकार भी नहीं पाता॥8॥ Actions involve efforts. IfContinue reading “FALSE PRETENCES OF SPIRITUALITY”

THE FIELD AND IT’S KNOWER

GITA WISDOM # 32 क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोरेवमन्तरं ज्ञानचक्षुषा ।भूतप्रकृतिमोक्षं च ये विदुर्यान्ति ते परम्‌॥ इस प्रकार क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के भेद को (क्षेत्र को जड़, विकारी, क्षणिक और नाशवान तथा क्षेत्रज्ञ को नित्य, चेतन, अविकारी और अविनाशी जानना ही ‘उनके भेद को जानना’ है) तथा कार्य सहित प्रकृति से मुक्त होने को जो पुरुष ज्ञान नेत्रों द्वाराContinue reading “THE FIELD AND IT’S KNOWER”