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HAPPY WOMEN’S DAY !

लेखनालय

Picture credit: Internet

“एक स्त्री”

जब बच्चों की नादानियाँ न थम रहे हों,
बापू की डाँट से बचने को वो सहम रहे हों,
तब ममता की छाव लिए जो पास आये, एक स्त्री।

जब चंदू खूब शैतानियां ढा रहा हो,
अपने बंधु से ही हाथापाई कर आ रहा हो,
तब पड़ोस की आंटी से जो बचाये, एक स्त्री।

जब खिलौनों की मनसा मन ही मन उमड़ रही हो,
स्वाती अपने भाई से माँगने को लड़ रही हो,
तब इक खिलौना नया जो पास लाये, एक स्त्री।

जब स्कूल का कार्य अधूरा रह रहा हो,
मास्टर रोज़-रोज़ शिकायतें कर रहा हो,
तब एक अध्यापिका जो घर-घर हम पाएं, एक स्त्री।

जब राखी का पर्व मिठाईयां ला रहा हो,
चंदू, स्वाती से स्नेह बंधवा रहा हो,
तब उसे फ़र्ज़ का पाठ जो पढ़ाये, एक स्त्री।

जब चंदू जवानी का पायदान चढ़ रहा हो,
और लड़का-लड़की में फर्क समझ रहा हो,
तब दोनों…

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