इश्क़

Navneet Kumar's avatarThe Horizon

जिस्म से नहीं, होता है जब इश्क़ रूह से
तब वो इश्क़, इश्क़ नहीं, बंधन रूहानी होता है ।

रोता है, जब कोई प्रेमी किसी की याद में
तब वो आँसू, आँसू नहीं, पवित्र मोती होता है ।

कोई ग़ज़लकार तो नहीं इश्क़ फरमाने वाले, पर इश्क़ में
कलम से निकला हर लफ्ज़ एक शायरी होता है ।

सिखा देता है इश्क़, इश्क़ में क्या से क्या कर गुज़रना
हर जाहिल आवारा दिल, इश्क़ में माहिर होता है ।

ज़माने से छुपाते फिरते हैं, अपने इश्क़ को इश्कजादे
पर इश्क़ बिन बताए, आँखों से जग-जाहिर होता है ।

इश्क़ को मिटाने के लिए बहुतेरे दुश्मन पैदा होंगे
पर इस बंधन को सँवारने खातिर खुदा खुद माली होता है ।

मुश्किल राहें अनेक हैं, एक से बढ़कर एक हैं
पर इश्क़ के खेल में, पत्थर भी पानी होता है ॥

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Published by Debasis Nayak

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5 thoughts on “इश्क़

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