अपने सपने हो गए

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एक-एक कर सब अपने अब सपने हो गए कुछ सपने हैं उसमें से कुछ ही अपने हैं जाने पहचाने रिश्ते अनजाने हो गए देखते-देखते क्या से क्या हो गए कुछ पल में बदल गए कुछ तो बस यूं ही बदल गए हम देखते रह गए कि कब हम पराए हो…