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RANDOM CLICKS #1

Clouds Over Sun.

Rising or Setting?


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मैं इंसान हूं

Profound to the roots.
Great poem!

The Horizon

समझना चाहो तो मैं
खुली किताब हूँ
नहीं तो
खुद से ही अनजान हूँ
किसी का अरमान
किसी का जहान हूँ
गलतियों की खदान
ज्ञान का आसमान हूं
मैं ही हूं जीवन
मैं ही आम
मैं ही खास हूं
प्रेम का स्रोत
अपना ही परिणाम हूं
मैं ही शांति दूत
मैं ही जंग का आधार
कभी पल-पल में अलग
कभी एक समान हूँ
न कम आंक मुझे
मैं इंसान हूँ
खुद में ही ब्रह्मांड हूँ ॥

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