सयुंक्त परिवार
Joint Familyचुनकर एक एक फूल ज्यूँ
गूँथी जाती प्रभु की माला
प्रेम प्यार की डोरी में बंध
बने सयुंक्त परिवार निरालाpick and choose each flower
to make Lord’s rosary
fastened in the bond of love
joint family became uniqueप्रेम प्यार का कच्चा धागा
कैसे पाये मजबूती
नियमित परस्पर संवाद
है मजबूती की बूँटीLove the raw thread of love
how to get stronger
regular mutual interaction
is the root of strengthइस धागे में आती दृढ़ता
हो बड़ों का सेवा सम्मान
जब छोटों के दृष्टिकोण पर
दिया जाता है पूरा ध्यानpersistence in this threading comes
with due respect to elders
when the approach of the little ones
is given full attentionबड़े होते बड़ पेड़ समान
सबको ढक रखते हैं छांव
इनकी चरण-सेवा कर लो
यही है भवसागर की नावelders are like a big trees
whose shade covers everyone
do their feet service
this is the boat of cosmic oceanखुशियों भरा बैठक का कमरा
स्नेह सिंचित हैं जिसके द्वार
चाय की प्याली में फूंक मारते
हर सुबह हिल मिल करें विचारThe meeting rooms full of happiness
whose doors are filled with affection
Taking sips from tea cups
Discuss every morning thoughtsएक रसोई एक ही चूल्हा
खाते समय होती बातें चार
सुख दुःख सब आपस में बांटे
ऐसा होता सयुंक्त परिवारone kitchen and one stove
Few discussions happen while eating
share all happiness and sorrows among all
joint family is like thoseआज के इस युग में खोजा
दूर दूर तक नज़रें पसार
बिरले ही साझा परिवार मिले
मुश्किल से होंगे ये दो चारdiscovered in today’s age
eyes glancing far and far
rarely found joint family
It will hardly be two or fourएकाकी जीवन में कहां अब
मिल पाता है सबका प्यार
आज के बच्चे नहीं जानते
कैसा क्या होता है परिवारWhere now in lonely life
can we get everyone’s love
today’s kids don’t know
how and what makes a familyक्यों ना ऐसी मुहिम चलायें
वृद्ध आश्रम सारे बंद करायें
मात पिता संग रह बच्चों को
संयुक्त परिवार का स्वाद चखाएं |why not run such a campaign
to close all old age homes
help children live with parents
make all experience the taste of joint family

सयुंक्त परिवार
चुनकर एक एक फूल ज्यूँ
गूँथी जाती प्रभु की माला
प्रेम प्यार की डोरी में बंध
बने सयुंक्त परिवार निराला
प्रेम प्यार का कच्चा धागा
कैसे पाये मजबूती
नियमित परस्पर संवाद
है मजबूती की बूँटी
इस धागे में आती दृढ़ता
हो बड़ों का सेवा सम्मान
जब छोटों के दृष्टिकोण पर
दिया जाता है पूरा ध्यान
बड़े होते बड़ पेड़ समान
सबको ढक रखते हैं छांव
इनकी चरण-सेवा कर लो
यही है भवसागर की नाव
खुशियों भरा बैठक का कमरा
स्नेह सिंचित हैं जिसके द्वार
चाय की प्याली में फूंक मारते
हर सुबह हिल मिल करें विचार
एक रसोई एक ही चूल्हा
खाते समय होती बातें चार
सुख दुःख सब आपस में बांटे
ऐसा होता सयुंक्त परिवार
आज के इस युग में खोजा
दूर दूर तक नज़रें पसार
बिरले ही साझा परिवार मिले
मुश्किल से होंगे ये दो चार
एकाकी जीवन में कहां अब
मिल पाता है सबका प्यार
View original post 38 more words
















You must be logged in to post a comment.