GITA WISDOM # 63 Chapter 17 verse 14 देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्।ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते॥ देवता, ब्राह्मण, गुरु (यहाँ ‘गुरु’ शब्द से माता, पिता, आचार्य और वृद्ध एवं अपने से जो किसी प्रकार भी बड़े हों, उन सबको समझना चाहिए।) और ज्ञानीजनों का पूजन, पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा- यह शरीर- सम्बन्धी तप कहा जाता हैContinue reading “THE FUNCTIONS OF THE BODY”
Tag Archives: inspiration
POSITIVE VIVES # 25
Have a nice weekend!
WRITING AND OUR HEALTH
Originally posted on Story Empire:
Hi SEers! Denise here, and today I’m going to talk about how writing affects our health. Writing has many benefits for our minds and brain. Letting those written words flow keeps our mind sharp as we get older, helps solve problems, allows us to express ourselves, and opens the door…
THE FREEDOM STATE OF MIND
GITA WISDOM # 62 Chapter 2 verse 72 एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति।स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति॥ हे अर्जुन! यह ब्रह्म को प्राप्त हुए पुरुष की स्थिति है, इसको प्राप्त होकर योगी कभी मोहित नहीं होता और अंतकाल में भी इस ब्राह्मी स्थिति में स्थित होकर ब्रह्मानन्द को प्राप्त हो जाता है ॥72॥ Once a leaderContinue reading “THE FREEDOM STATE OF MIND”
TO BE SUCCESSFUL…
Have a powerful day!
HAPPINESS
Have a great weekend!
TRUE STATUS OF THE EQUIPOISED MIND
GITA WISDOM # 61 Chapter 59 Verse 2 विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः।रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्टवा निवर्तते॥ इन्द्रियों द्वारा विषयों को ग्रहण न करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, परन्तु उनमें रहने वाली आसक्ति निवृत्त नहीं होती। इस स्थितप्रज्ञ पुरुष की तो आसक्ति भी परमात्मा का साक्षात्कार करके निवृत्त होContinue reading “TRUE STATUS OF THE EQUIPOISED MIND”
THE GENTLE GUIDANCE
GITA WISDOM # 60 Chapter 2 verse 10 तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत।सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदंतमिदं वचः॥ हे भरतवंशी धृतराष्ट्र! अंतर्यामी श्रीकृष्ण महाराज दोनों सेनाओं के बीच में शोक करते हुए उस अर्जुन को हँसते हुए से यह वचन बोले ॥10॥ Krishna opens his advice, with a semblance of a gentle smile, to the grief-struck Arjuna. This befitsContinue reading “THE GENTLE GUIDANCE”
SKILLS AND COMPETENCE
GITA WISDOM # 59 Chapter 4 verse 32 एवं बहुविधा यज्ञा वितता ब्रह्मणो मुखे।कर्मजान्विद्धि तान्सर्वानेवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे॥ इसी प्रकार और भी बहुत तरह के यज्ञ वेद की वाणी में विस्तार से कहे गए हैं। उन सबको तू मन, इन्द्रिय और शरीर की क्रिया द्वारा सम्पन्न होने वाले जान, इस प्रकार तत्व से जानकर उनके अनुष्ठानContinue reading “SKILLS AND COMPETENCE”
WIN-WIN APPROACH
GITA WISDOM # 58 Chapter 3 verse 11 देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः।परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ॥ तुम लोग इस यज्ञ द्वारा देवताओं को उन्नत करो और वे देवता तुम लोगों को उन्नत करें। इस प्रकार निःस्वार्थ भाव से एक-दूसरे को उन्नत करते हुए तुम लोग परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे ॥11॥ Chief executives shallContinue reading “WIN-WIN APPROACH”
POSITIVE VIBES # 20
Happy Sunday!
GREAT MIND
Originally posted on Divine-Royalty:
Truth is always served by great minds, even if they fight it. “Jean Rostand” As your thoughts are, so is your life. Weak thoughts hardly have any effect, but powerful thoughts can create great change. Thoughts are energy. Though subtle and invisible, they can affect reality. Just like the wind, which…
THE TORTOISE SYNDROME
GITA WISDOM # 57 Chapter 2 Verse 58 यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गनीव सर्वशः।इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥ और कछुवा सब ओर से अपने अंगों को जैसे समेट लेता है, वैसे ही जब यह पुरुष इन्द्रियों के विषयों से इन्द्रियों को सब प्रकार से हटा लेता है, तब उसकी बुद्धि स्थिर है (ऐसा समझना चाहिए) ॥58॥ The leaderContinue reading “THE TORTOISE SYNDROME”
POSITIVE VIBES # 19
Have great time…
POSITIVE VIBES # 18
Happy weekend!