STAGES OF FORGIVENESS

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Though forgiveness can help repair a damaged relationship, it doesn’t obligate you to reconcile with the person who harmed you, or release them from legal accountability. Instead, forgiveness brings the forgiver peace of mind and frees him or her from corrosive anger. Here are the four stages of forgiveness : Uncovering – Gaining insight…

BENCHMARKING LEADERSHIP

GITA WISDOM #52 Bhagavad Gita: Chapter 3 Verse 20 कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि॥ जनकादि ज्ञानीजन भी आसक्ति रहित कर्मद्वारा ही परम सिद्धि को प्राप्त हुए थे, इसलिए तथा लोकसंग्रह को देखते हुए भी तू कर्म करने के ही योग्य है अर्थात तुझे कर्म करना ही उचित है॥20॥ It is essential for a chief executiveContinue reading “BENCHMARKING LEADERSHIP”

FALSE PRETENCES OF SPIRITUALITY

GITA WISDOM # 51 दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत्‌।स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत्‌॥ जो कुछ कर्म है वह सब दुःखरूप ही है- ऐसा समझकर यदि कोई शारीरिक क्लेश के भय से कर्तव्य-कर्मों का त्याग कर दे, तो वह ऐसा राजस त्याग करके त्याग के फल को किसी प्रकार भी नहीं पाता॥8॥ Actions involve efforts. IfContinue reading “FALSE PRETENCES OF SPIRITUALITY”

NEGATIVE CHARITY

GITA WISDOM # 50 अदेशकाले यद्दानमपात्रेभ्यश्च दीयते।असत्कृतमवज्ञातं तत्तामसमुदाहृतम्‌॥ जो दान बिना सत्कार के अथवा तिरस्कारपूर्वक अयोग्य देश-काल में और कुपात्र के प्रति दिया जाता है, वह दान तामस कहा गया है॥22॥ The foolish mortals resort to methods of charity which are directed to the wrong recipients at the wrong time and place and are givenContinue reading “NEGATIVE CHARITY”

AGGRESSIVE CHARITY

GITA WISDOM #49 यत्तु प्रत्युपकारार्थं फलमुद्दिश्य वा पुनः।दीयते च परिक्लिष्टं तद्दानं राजसं स्मृतम्‌॥ किन्तु जो दान क्लेशपूर्वक (जैसे प्रायः वर्तमान समय के चन्दे-चिट्ठे आदि में धन दिया जाता है।) तथा प्रत्युपकार के प्रयोजन से अथवा फल को दृष्टि में (अर्थात्‌ मान बड़ाई, प्रतिष्ठा और स्वर्गादि की प्राप्ति के लिए अथवा रोगादि की निवृत्ति के लिए।)Continue reading “AGGRESSIVE CHARITY”

THE RIGHT WAY OF CHARITY

GITA WISDOM # 48 दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्‌॥ दान देना ही कर्तव्य है- ऐसे भाव से जो दान देश तथा काल (जिस देश-काल में जिस वस्तु का अभाव हो, वही देश-काल, उस वस्तु द्वारा प्राणियों की सेवा करने के लिए योग्य समझा जाता है।) और पात्र के (भूखे, अनाथ,Continue reading “THE RIGHT WAY OF CHARITY”

NEGATIVE SPIRITUALITY

GITA WISDOM # 47 मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः।परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम्‌॥ जो तप मूढ़तापूर्वक हठ से, मन, वाणी और शरीर की पीड़ा के सहित अथवा दूसरे का अनिष्ट करने के लिए किया जाता है- वह तप तामस कहा गया है ॥19॥ Obstinate spirituality that hurts body and mind as well as causes harm to others isContinue reading “NEGATIVE SPIRITUALITY”

RITUALS OF THE LAZY FOLKS

GITA WISDOM # 45 विधिहीनमसृष्टान्नं मन्त्रहीनमदक्षिणम्‌।श्रद्धाविरहितं यज्ञं तामसं परिचक्षते॥ शास्त्रविधि से हीन, अन्नदान से रहित, बिना मन्त्रों के, बिना दक्षिणा के और बिना श्रद्धा के किए जाने वाले यज्ञ को तामस यज्ञ कहते हैं ॥13॥ Men possessed of lazy approaches to life carry out religious practices not sanctified by the scriptures with indifference and bereftContinue reading “RITUALS OF THE LAZY FOLKS”